वृन्दावन।वंशीवट क्षेत्र स्थित श्रीनाभापीठ सुदामा कुटी में श्रीरामानंदीय वैष्णव सेवा ट्रस्ट के द्वारा चल रहे अनन्तश्री विभूषित श्रीरामानंदाचार्य महाराज के दस दिवसीय जयंती महामहोत्सव के तीसरे दिन जानकी वल्लभ मन्दिर के महंत जगद्गुरु स्वामी अनिरुद्धाचार्य महाराज व आचार्य कुटी के अध्यक्ष श्रीमज्जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी रामप्रपन्नाचार्य महाराज ने कहा कि श्रीनाभापीठ सुदामा कुटी में जगद्गुरु स्वामी रामानंदाचार्य महाराज की परम्पराओं का निर्वाह आज भी श्रीमज्जगद्गुरु द्वाराचार्य श्रीनाभापीठाधीश्वर स्वामी सुतीक्ष्णदास देवाचार्य महाराज के निर्देशन में भली-भांति किया जा रहा है।यह स्थान प्रत्येक निराश्रित व्यक्ति की आश्रय स्थली के रूप में प्रसिद्ध है। बड़ी सूरमा कुंज के महंत प्रेमदास शास्त्री महाराज व संगीताचार्य पंडित देवकीनंदन शर्मा ने कहा कि श्रीनाभापीठ सुदामा कुटी में नर सेवा नारायण सेवा की भांति हुआ करती है।यहां पर संतों व निराश्रितों को निःशुल्क अन्न सेवा, वस्त्र सेवा, औषधि सेवा व जीवनोपयोगी सामग्री उपलब्ध करायी जाती है।इसके अलावा गायों के लिए चारा,पक्षियों के लिए दाना व बंदरों के लिए फल सेवा भी की जाती है।ब्रज साहित्य सेवा मंडल के अध्यक्ष डॉ. गोपाल चतुर्वेदी व भागवताचार्य पंडित सुरेशचंद्र शास्त्री कहा कि सुदामा कुटी के संस्थापक गोलोकवासी संत सुदामादास महाराज श्री रामानंद सम्प्रदाय की बहुमूल्य निधि थे।उनका सारा जीवन लोक कल्याण में ही व्यतीत हुआ।उन जैसी पुण्यात्माएं अब इस संसार में बहुत ही कम हैं।वे त्याग,तपस्या व वैराग्य की प्रतिमूर्ति थे।उन्ही के प्रताप से सुदामा कुटी आश्रम आज श्रीधाम वृन्दावन का ललाट बनकर चमक रहा है।इस अवसर पर श्रीमज्जगद्गुरु द्वाराचार्य श्रीनाभापीठाधीश्वर स्वामी सुतीक्ष्णदास देवाचार्य महाराज, महंत अमरदास महाराज, महंत राघवदास महाराज,अयोध्या के महंत नरहरिदास महाराज, गोविंदाचार्य महाराज,युवा साहित्यकार डॉ. राधाकांत शर्मा,भरत शर्मा, मोहन शर्मा, नंदकिशोर अग्रवाल, अवनीश शास्त्री, सौमित्र दास, डॉ. अनूप शर्मा, भक्तिमती वृंदावनी शर्मा, रसिक शर्मा आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किए। संचालन संत रामसंजीवन दास शास्त्री ने किया।दोपहर को मथुरा के प्रख्यात श्रीसिद्ध विनायक रामलीला संस्थान के द्वारा स्वामी आनंद चतुर्वेदी के निर्देशन में नारद मोह लीला का अत्यंत नयनाभिराम व चित्ताकर्षक मंचन किया गया। रात्रि को प्रख्यात रासाचार्य स्वामी श्रीचंद्र शर्मा की रासमंडली के द्वारा रासलीला का मनोहारी मंचन हुआ।

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