– । देवता भी ब्रज रज की अभिलाषा रखते हैं। भजन, आराधन और युगल सरकार राधा कृष्ण की कृपा से यह ब्रज रज सहज ही प्राप्त हो जाती है आचार्य रामविलास चतुर्वेदी जी को जन्म दिवस की वधाई एवं आशीर्वाद यह विचार स्वामी श्रीगोविन्दनन्द तीर्थ जी महाराज ने मंगलवार को वृन्दावन शोध संस्थान में आयोजित ब्रज रज महोत्सव के अवसर पर कहे। वृंदावन शोध संस्थान एवं अखिल भारतवर्षीय ब्राह्मण महासभा के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा ब्रज रज की कृपा से भक्ति का भी उद्धार हुआ। यदुनंदन महाराज ने कहा कि ब्रज रज की प्राप्ति के लिए भगवान ने स्वयं यहां अवतरण लिया। आचार्य आदित्यानंद जी एवं मारूतिनंदन वागीश ने कहा समस्त पृथ्वी का आधान ब्रजमंडल है। महामंडलेश्वर कृष्णानंद जी एवं आचार्य बलराम जी महाराज ने कहा भगवान शालिग्राम रूप में एवं वृंदा ने वृक्ष रूप में यहां अवतरण लिया। स्वामी सत्यानंद जी एवं आचार्य नेत्रपाल शास्त्री ने कहा भगवान की महती अनुकंपा से ही ब्रज रज की प्राप्ति होती है। भागवत वक्ता अनिरूद्धाचार्य जी एवं स्वामी सत्यानंद जी महाराज ने कहा ब्रज में आकर और ब्रज रज को माथे से लगाकर इस रस का आनंद लिया जा सकता है। आचार्य कर्मयोगी जी महाराज एवं पं.अशोक व्यास ने कहा ठाकुर जी ने ब्रज रज को अपने मुख में स्थान दिया है। राधाकांत शर्मा एवं महंत नवल गिरि जी महाराज ने कहा कि संतों ने बार-बार ब्रज में जनम लेने की कामना की है। जगदीश प्रसाद सुपानिया एवं गोपाल चतुर्वेदी ने कहा ब्रज रज की आकांक्षा करने वाले भक्त जन बाहर से आकर प्रभु कृपा प्राप्त करने के लिए यहीं जीवन पर्यन्त निवास करते हैं। कार्यक्रम के दौरान आचार्य बलराम जी महाराज, रविकांत गर्ग, योगेन्द्र भारद्वाज, गजेंद्र शर्मा एवं राममोहन शर्मा आदि ने विचार व्यक्त करने के साथ आचार्य रामविलास चतुर्वेदी को जन्मदिवस की बधाईयां दीं। इस अवसर पर संस्थान के सचिव प्रवीण गुप्ता, उप-निदेशक डाॅ.एस.पी.सिंह, द्वारिका चित्रकार श्रीकांत शर्मा तथा आचार्य रामविलास चतुर्वेदी को शैक्षिक एवं सामाजिक विषयक उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रशस्ति पत्र देकर सम्मान किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता पं.बिहारीलाल वशिष्ठ द्वारा की गई। इससे पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ स्वस्ति वाचन एवं ठा.बांकेबिहारी जी के चित्रपट पर दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। कार्यक्रम का संचालन आचार्य बद्रीश जी द्वारा किया गया। इस दौरान हरी रावत, नरोत्तम शास्त्री, नागेंद्र कार्ष्णि, हरिहर मुदगल, हरिचरण, रामानुजाचार्य, बाबा बालकृष्ण, गिरीश गुप्ता, विष्णुकांत शास्त्री, राजेश जी पहलवान, योगेश द्विवेदी, आशीष चतुर्वेदी, रामदत्त, सेवानंद जी महाराज, विनोद शर्मा, महेशचंद शर्मा, ज्ञानेशचंद्र गौड़, विनोद राघव, योगेश कुमार गौतम, मदनगोपाल बनर्जी, दामोदर गोस्वामी, नरेंद्र शास्त्री, रामरतन शास्त्री, अभिशेककृष्ण शास्त्री, जगदीश गोस्वामी, प्रशांत मिश्रा, नमामि पांडेय, गोविंदवल्लभ, सुरेशचंद्र शर्मा, हेतराम शर्मा, पद्मचंद्र शर्मा, भूदेवप्रसाद शर्मा, रूपकिशोर उपमन्यु, संजय शर्मा एवं पं.वीरपाल मिश्रा आदि सम्मानित जन उपस्थित रहे।

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