इतिहास में पहली बार निधिवन में हुआ महारास का मंचन


वृन्दावन, वैसे तो श्री धाम वृंदावन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मंदिरों और भगवान की लीलाओं के लिए प्रसिद्ध है। लेकिन इतिहास में पहली बार भक्तों को श्री निधिवन राज में असली महारास के दर्शन करने को मिले। शरदोत्सव यानी शरद पूर्णिमा के पावन पर्व पर जन-जन के आराध्य भगवान श्री कृष्ण अपनी गोपियों की इच्छा पूर्ति हेतु महारास का आयोजन किया था। द्वापर युग में भगवान श्री कृष्ण ने श्री राधारानी एवं समस्त गोपियों के साथ महारास रचा कर सभी की इच्छाएं पूरी की थी। क्योंकि सभी गोपियों के मन में भगवान को पति के रूप में पाने की इच्छा थी इसीलिए प्रेम के वशीभूत होकर भगवान ने प्रत्येक गोपी के साथ रास किया।वैसे तो वृन्दावन आने वाले सभी भक्तों को पता है कि निधिवन राज में आज भी भगवान श्री कृष्ण समस्त गोपियों के साथ महारास करते हैं। लेकिन पुराणों के अनुसार शरद पूर्णिमा की रात्रि में भगवान श्री कृष्ण ने श्री राधारानी एवं समस्त गोपियों के साथ रास रचाया था तब 6 महीने की एक रात हुई हुई थी। साथ ही कामदेव के अहंकार को भी चूर किया था। भगवान शंकर ने इसी महारास के दर्शन हेतु गोपी का रूप धारण किया था और आज भी वे गोपेश्वर महादेव के रूप में श्री धाम वृंदावन में विराजमान है और प्रत्येक शरद पूर्णिमा की रात्रि में अपने इष्ट भगवान श्री कृष्ण के साथ महारास का आनंद लेते हैं।ऐसी ही एक लीला शरद पूर्णिमा की रात्रि श्री निधिवन राज में देखने को मिली जोकि ठाकुर श्री बांके बिहारी की प्राकट्य स्थली एवं स्वामी हरिदास जी महाराज की साधना स्थली भी है। ऐसे पावन स्थल पर पद्मश्री रासाचार्य स्वामी हरगोविंद के पुत्र स्वामी अवधेश महाराज की रास मंडली के द्वारा महारास का मंचन किया गया। जिसे देख कर वहां बैठे भक्त अपनी सुध बुध भूल कर महारास की लीला को निहारते रहे। महारास की लीला का कार्यक्रम सेवायत भीकचंद गोस्वामी एवं रोहित गोस्वामी के सानिध्य में किया गया।

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