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सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों का खुला उल्लंघन

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ब्रजतीर्थ विकास परिषद् द्वारा कैंटीन/विश्रामालय निर्माण के नाम प्राचीन हरे वृक्षों एवं प्राचीन ब्रहमगिरि की शिलाओं की दी जा रही है बलि 

स्थानीयजनों के विरोध के बाद दिन के बजाय रात्रि में पुलिसबल की मौजूदगी में पूरा हो रहा है उक्त अवैध निर्माण

परिषद् द्वारा रात्रि में कैंटीन के नाम पर विभिन्न हरे वृक्षों को काट जा रहा है

बरसाना ग्राम सभा ने 40 वर्ष उद्यान विभाग को करीब 100 एकड़ भूमि पर्वतीय अभ्यारण्य के रूप में सुरक्षा और संरक्षण के लिए दी थी

वृन्दावन, सामाजिक कार्यकर्ता महंत मधुमंगल शरण दास शुक्ल ने प्रदेश के मुख्यसचिव को बरसाना में स्थित प्राचीन ब्रहमांचल पर्वत पर हो रहे अवैध कब्जों को रोकने एवं लगातार पर्वत को नष्ट करने एवं उस पर लगे प्राचीन वृक्षों को काटकर कैंटीन/विश्रामालय ब्रज तीर्थ विकास परिषद् द्वारा बनवाने के विरोध में एक पत्र लिखा है।
महंत ने कहा है कि करीब 40 वर्ष पूर्व बरसाना ग्राम सभा द्वारा उद्यान विभाग को ब्रहमाजी पर्वत के करीब 100 एकड़ पर्वतीय अभ्यारण्य, पर्यावरणीय, आध्यात्मिक, पौराणिक महत्व की यह धरोहर सुरक्षा और संरक्षण के लिए दी है। लेकिन शासन-प्रशासन द्वारा रात्रि में मनमाने रूप से कैंटीन/विश्रामालय का निर्माण कराया जा रहा हैं, कैंटीन के नाम पर प्राचीन हरे वृक्षों एवं ब्रहमगिरि की प्राचीन शिलाओ की बलि दी जा रही है।
महंत ने कहा है कि विश्वप्रसिद्ध श्रीराधारानी का मंदिर ब्रहमांचल पर्वत पर स्थित हैं, मान्यता है कि बरसाना में स्वयं ब्रहमाजी लाड़लीलाल की क्रीडा और लीलाओं के दर्शन करने के लिए पर्वत के रूप में प्रकट हुए है। प्रशासन/परिषद् द्वारा विकास के नाम पर प्राचीन पर्वत को नष्ट करके विनाश किया जा रहा हैं।
जब स्थानीयजनों द्वारा इस अवैध निर्माण का विरोध किया गया तो उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद् के अधिकारी दिन के बजाय रात्रि में पुलिसबल की मौजूदगी इस अवैध निर्माण को लगातार अंजाम दे रहे हैं। रात्रि में किसी भी तरह का निर्माण कार्य करना यह कानूनी रूप से अवैध होता है एवं माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों का खुला उल्लंघन है। बरसाना में स्थानीय संतों, नागरिकों एवं आने-वाले तीर्थयात्रियों के सुझावों एवं प्रस्तावों दरकिनार कर हठधर्मिता से कैंटीन/विश्रामालय का निर्माण पर्वत पर रात्रि में पुलिसबल की मौजूदगी अवैध तरीके से लगातार कराया जा रहा है।
महंत ने कहा कि कैंटीन/विश्रामालय के नाम पर प्राचीन पर्वत एवं प्राचीन वृक्षों को नष्ट करने के उद्देश्य से जारी उपरोक्त निर्माण में तत्काल निर्णय लेकर इन अवैध कार्यों को रूकवाने की कृपा करें, अन्यथा की स्थिति में प्रार्थी को माननीय न्यायालय की शरण लेनी पड़ेगी, जिसकी समस्त जिम्मेदारी शासन एवं प्रशासन की होगी।

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