Mon. Sep 16th, 2019

MATHURA NEWS 24

NO.1 HINDI NEWS CHANNNEL

स्वामी श्री हरिदास जी महाराज ने इस संगीत साधना से ही श्री बांके बिहारी जी का प्राकट्य किया – श्रीस्वामी रामेश्वराचार्य

1 min read

वृन्दावन

अखिल भारतीय स्वामी श्रीहरिदास संगीत सम्मेलन एवं स्वामी हरिदास संगीत कला रत्न सम्मान समारोह के द्वितीय दिवस के कार्यक्रम का शुभारम्भ जगद्गुरू रामानुजाचार्य जी श्रीस्वामी रामेश्वराचार्य जी महाराज ने स्वामी श्री हरिदास जी महाराज के चित्रपट पर पुष्पार्चन एवं दीप प्रज्जवलित कर किया।
इस अवसर पर अपने उद्बोधन में मुख्य अतिथि जी ने कहा कि संगीत ही जीवन का सच्चा आधार है वह संगीत भले ही किसी देश या विधा का हो जिसने संगीत को जीवन का अंग बना लिया उसका जीवन सरल, निर्मल एवं पवित्र हो जाता है तथा उसे हर वस्तु से अद्भुत सुखानभूति होती है और वह लोकप्रिय बन संगीत के माध्यम से परमपिता परमेश्वर के सान्निध्य तक को प्राप्त कर लेता है। स्वामी श्री हरिदास जी महाराज ने इस संगीत साधना से ही श्री बांके बिहारी जी महाराज का प्राकट्य किया। वे धु्रपद के पुरोधा एवं प्रथम गुरू थे। उनके पावन अवतरण महोत्सव पर में उन्हें कोटि-कोटि नमन करते हुए आयोजकों को साधूवाद देता हूँ।
संस्थान के अध्यक्ष आचार्य अतुल कृष्ण गोस्वामी एवं समारोह के संयोजक पं0 बिहारी लाल वशिष्ठ जी ने मुख्य अतिथि को ठा0 जी प्रसादी उत्तरीय उढ़ाकर स्वामी जी का सम्मान किया तथा बांके बिहारी जी महाराज का चित्रपट भेट किया।
संगीत समारोह की प्रथम प्रस्तुति कोलकाता से आयी नृत्यांगना सुश्री नन्दनी चैधरी के पारम्परिक ओड़िसी नृत्य “आहे नील शैलः”, “राधा रानी संगे नाचे मुरली पानी” ओडिसी नृत्य अभियन है जहाँ भगवान विष्णु कृष्ण, जगन्नाथ जी को पूजा जाता है और बताया जाता है कि उन्होंने द्रोपती जी को कौरवों से कैसे बचाया। प्रस्तुति को देखकर सारा प्रांगण कृष्ण मय हो गया।
द्वितीय प्रस्तुति श्री अजय प्रसन्ना जी दिल्ली ने वंशी बजाकर की जिसे सुन सभी  श्रोता ध्यान मग्न हो बांसुरी के सुरों में खो गये। विभिन्न रागों एवं आयामों से बजायी गयी बांसुरी ने एक बार फिर से श्रीकृष्ण द्वारा वंशीवट पर यमुना किनारे बजाये गयी बांसुरी की धुन को साकार कर दिया।  जिसमें विभिन्न रागों के माध्यम से वंशी पर अपनी कला का प्रदर्शन कर जहाँ एक ओर समारोह को सतरंगी बना दिया वहीं कला प्रदर्शन से दर्शकों को अचम्भित कर दिया। लखनऊ से आये श्री नीरज सक्सैना ने भी अपनी मधुर वंशी की साथ में प्रस्तुति दी। संगत में तबले पर प्रियांश एवं ढोलक पर मास्टर तनमय ने अपनी प्रस्तुति दी।
अगली प्रस्तुति सुश्री शैफाली गोयल, दिल्ली ने पुष्पांजली गणेश स्तुति के साथ हुआ जिसका भाव एक नयी भाव भंगिमा को सजोय इनकी उपस्थिति को नये आयाम देता गया। उनकी प्रस्तुति में तीन ताल, नृत पक्ष उठान, ठाठ, आमद, गत निकास, लड़ी इत्यादि की प्रस्तुति की और आखिर में भजन “चोक पुराओं माटी रंगाओ, आज मोरे पिया घर आऐंगे” भजन पर पच्चीस चक्कर लगाकर अद्भतु प्रस्तुति दी। आज संगीत समारोह का मंच भव्यता के चरमोत्कर्ष पर था चारों ओर सुगन्धित फूल एवं विद्वुत के बहुरंगी प्रकाश से समारोह स्थल जगमगा रहा था।
इसके बाद दिल्ली से आयी सुश्री विधि शर्मा द्वारा अपने शास्त्रीय संगीत में अद्भुत गायन प्रस्तुत किया। जिसमें “देखो री या मुकुट की लटकन”, राधे झूलन पधारो झुकी आए बदरा” भजन प्रस्तुत किया। शास्त्रीय संगीत की सुर लहरी में सारा वातावरण आनंदित हो गया एवं सारा समारोह प्रांगण मंत्र मुग्ध हो गया। उनके साथ तबले पर संगत श्री प्रशान्त त्रिवेदी जी ने किया।
कार्यक्रम के समापन पर संस्थान के अध्यक्ष आचार्य अतुल कृष्ण गोस्वामी ने सभी कलाकारों को सम्मानित किया तथा कार्यक्रम स्थल पर उपस्थित सभी श्रोताओं का आभार प्रकट करते हुए स्वामी श्री हरिदास जी महाराज को भावपूर्ण नमन किया।
इस अवसर पर आचार्य अतुल कृष्ण गोस्वामी, पं0 बिहारी लाल वशिष्ठ, महेशानंद सरस्वती जी महाराज, स्वामी फतेकृष्ण जी, महंत परमेश्वरवदास जी, महंत अमर दास जी, भक्ति वेदान्त मधुसूदन महाराज, राम किशन गोस्वामी, ब्रज बिहारी शर्मा, राम बाबू शर्मा, विष्णु मोहन नागाज, श्री प्रेम कुमार गोस्वामी, बालो पंडित, श्री तमाल कृष्ण दास, भीक चन्द्र गोस्वामी पं0 प्रदीप गोस्वामी, पं0 महेन्द्र सिंह शर्मा, हरी किशन सारस्वत, मयंक शर्मा, पं0 अरविन्द गोस्वामी, आदि अनेक गणमान्य नागरिक एवं संगीत प्रेमी उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन रश्मि शर्मा ने किया एवं धन्यवाद ज्ञापन आचार्य अतुल कृष्ण गोस्वामी जी ने किया।

0Shares

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Copyright © All rights reserved. | Newsphere by AF themes.