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शास्त्रों को प्रकट करने के लिए भगवान ने धारण किया हयग्रीव स्वरूप

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भद्र वन में ठा.राधारमण लाल ने हयग्रीव स्वरूप में दिए दर्शन, वेदों का हुआ प्राकट्य

विख्यात भजन गायक गोविंद भार्गव की भजन संध्या में झूमे भक्तगण, बरसा प्रेम रस 

वृन्दावन, 21 जून, 2019। द्वादश वनबिहार लीलान्तर्गत ठा.राधारमण लाल जू ने भद्र वन में हयग्रीव स्वरूप में दर्शन दिए और वेदों का प्राकट्य होते हुए दिखाया गया। इस अवसर पर विख्यात भजन गायक गोविंद भार्गव ने अपनी प्रस्तुति से भक्तों को भक्ति में डिबो कर प्रेमरस बरसाया। 
निकुंज महोत्सव में ब्रज की प्राचीन फूलबंगला कला के विशेषज्ञ एवं कलाकार पं.जुगलकिशोर शर्मा के निर्देशन में ब्रजवासी बालकों ने भद्रवन की निकुंज सजाई। जिसमें केले के वृक्ष से हयग्रीव (अश्व) और चारों वेद ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद के प्राकट्य की झांकी बनाई गई। आध्यात्मिक गुरू एवं मंदिर सेवायत आचार्य श्रीवत्स गोस्वामी ने भद्रवन निकुंज का महत्व बताते हुए कहा कि साधकों के भद्र आचरण हेतु शास्त्र की मर्यादा आवश्यक है। उन्हीं शास्त्रों को प्रकट करने के लिए भगवान ने हयग्रीव स्वरूप धारण किया है। उनकी श्वास प्रति श्वास से चोरों वेद प्रकट हुए हैं। जानने योग्य जितनी भी बातें हैं, उनको वेद कहते हैं। मानव के जितने शास्त्र उनकी जड़ें वेद में ही निहित हैं। ब्रजगोपियों के माध्यम से जगत पर कल्याण करने हेतु भगवान श्रीकृष्ण ने हयग्रीव स्वरूप भद्रवन में धारण किया है। 
इस अवसर पर विख्या भजन गायक गोविंद भार्गव ने भजन संध्या प्रस्तुत की। उन्होंने मैं नाचूंगी बनकर मोर, मेरे नटवर नंदकिशोर, बसा लो श्री वृन्दावन में…., छवि देखी राधारमण की श्याम सुंदर की…. आदि भजन प्रस्तुत कर वातावरण को रसमय कर दिया। कलाकारों का स्वागत एवं सम्मान आचार्य वेणुगोपाल गोस्वामी ने किया। सायंकाल की संध्या आरती आचार्य सुवर्ण गोस्वामी ने की। सभी आगंतुक भक्तों का स्वागत सेवायत अभिनव गोस्वामी ने किया।
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