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राधा नाम के जयकारों से राधामय हुआ वृन्दावन चंद्रोदय मंदिर

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भक्ति रूपी बीज को सींचने का विशेष अवसर राधाष्टमीः चंचलापति दासश्री

वृन्दावन, भक्ति वेदांत स्वामी मार्ग स्थित वृन्दावन चंद्रोदय मंदिर में श्रीकृष्ण की आल्हादिनी शक्ति श्रीराधा रानी का प्राकट्योत्सव भक्ति भाव के साथ मनाया गया। भाद्रपद की शुक्ल अष्टमी के इस पावन दिवस पर प्रातः कालीन बेला में मंगला आरती के साथ श्रीश्री राधा रानी जी के जन्मोत्सव का शुभारंभ हुआ। इस दौरान श्रीश्री राधा वृन्दावन चंद्र जी की धूप आरती, नवीन पोषाक धारण, फूल बंगला, झूलन उत्सव, छप्पन भोग, अभिषेक, भजन संध्या एवं महाआरती का आयोजन किया गया।
सनातन धर्म के अनुसार श्रीकृष्ण की आल्हादिनी कृपा शक्ति लाड़ली राधिक का जन्म भाद्रपद की शुक्ल अष्टमी को हुआ। इस पावन दिवस को राधाष्टमी के रूप में मनाया जाता है। सर्वेश्वरी श्री राधिका के जन्मोत्सव के  पावन पर्व पर चंद्रोदय मंदिर में श्रीश्री राधा रानी एवं ठाकुर श्रीश्री वृन्दावन चंद्र के महाभिषेक का आयोजन किया गया। जिसमें श्रीश्री राधावृन्दावन चंद्र का महाभिषेक वैदिक मंत्रोच्चारण, पंचामृत दूध, दही, घी , शहद, बूरा एवं विभिन्न प्रकार के फलों के रस, विभिन्न जड़ी बूटियों एवं फूलों से महाभिषेक प्रक्रिया को संपन्न किया गया। इस मौके पर ठाकुर राधावृन्दावन चंद्र को नीले एवं गुलाबी रंग के रेशम युक्त चाँदी से कढ़ाई किए हुए वस्त्र धारण कराए गए। वहीं निताई गौरांग को भी आकर्षक वस्त्र एवं विशेष रूप से तैयार की गई, पुष्पों की मालाओं से सजाया गया। इसके पश्चात विशेष नृरसिम्हा हवन का आयोजन मंदिर प्रांगण में किया गया।
इस अवसर पर संस्था के अध्यक्ष श्री चंचलापति दास ने उपस्थित भक्तों को श्रीमती राधा रानी के सर्वोच्च अराध्य गुण का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि सर्वेश्वरी श्री राधा रानी जी सदैव श्री कृष्णा की इच्छाओं की पूर्ति करने हेतु आतुर रहती हैं। यदि कोई जीव कृष्ण चरणाविंद की भक्ति को प्राप्त कराना चाहता है। तो उसे राधा नाम रूपी रस का पान करना पडे़गा। उन्होंने आगे कहा कि आज का “श्री राधाष्टमी उत्सव“ का आयोजन श्रीमती बृषभानु नंदनी को याद कर अपने भक्ति रूपी बीज को सीचने का अवसर है। 
इस राधाष्टमी के विशेष अवसर पर हरिनाम संकीर्तन में बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं ने आस्था, उल्लास और भक्ति की त्रिवेणी में डुबकी लगायी। इस दौरान सम्पूर्ण मंदिर का प्रांगण राधे राधे की गूंज से राधामय हो गया। इस अवसर पर चंद्रोदय मंदिर के अध्यक्ष श्री चंचलापति दास, उपाध्यक्ष भरतर्षभा दास, उपाध्यक्ष युधिष्ठिर कृष्ण दास, सहित अन्य संत कार्यक्रम में शमिल हुए।

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