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मेरौ कान्हा को कोई मत देखो नजरिया लग जाएगी रे….

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बहुला वन निकुंज में पद्मनाभ स्वरूप ठा.राधारमण लाल ने दिए दर्शन
-बहुला गाय और उसके बछड़े को दिया अभयदान, फूलबंगला में लीला का किया गया चित्रांकन…….

वृन्दावन, 19 जून, 2019। दिव्य ग्रीष्मकालीन निकुंज सेवा महोत्सव में ठा.राधारमण लाल जू में द्वादश वनबिहार लीलान्तर्गत बहुला वन निकुंज में विराजमान होकर दर्शन दिए। वहीं नैना श्रीवास्तव, पं.दामोदर शर्मा, मानस गोस्वामी, सुजीत कुमार ओझा एवं सायंकाल स्वामी फतेहकृष्ण एवं स्वामी हरेकृष्ण शरद की जुगलबंदी ने समां बांध दिया।
निकुंज महोत्सव में ब्रज की प्राचीन फूलबंगला कला से सुसज्जित बहुला वन निकुंज सजाई गई। केले के वृक्षों से बनीं बहुला गाय के समक्ष विराजे ठा. राधारमण एवं नीचे उसके बछड़े, सिंह की झांकी बरबस ही श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित कर रही थी।
आध्यात्मिक गुरू एवं मंदिर सेवायत आचार्य श्रीवत्स गोस्वामी ने बहुला वन निकुंज का महत्व बताते हुए कहा कि शास्त्रों में ऐसा उल्लेख है कि गौचारण के समय एक शेर अचानक उपस्थित हो गया और एक बछड़े को अपना ग्रास बनाना चाहा। इस पर बछड़े की मां बहुला नामक गाय सिंह से प्रार्थना करने लगी कि वह बछड़े को छोड़ दें, मुझे अपना आहार बना ले, लेकिन बछड़े ने कहा कि मेरी मां को नहंी बल्कि मुझे अपना आहार बना लो। बछड़े की मां के प्रति और मां की बछड़े के प्रति निष्काम प्रीति को देखकर गोपालकृष्ण बहुत प्रसन्न हुए और उनसे प्रसन्न होकर बहुला गाय और उसके बछड़े को अभयदान प्रदान किया। उन्होंने बताया कि बहुला वन वात्सल्य भाव की भूमि हैं। यह 33 कोटि देवता गौमाता की वह अनन्य विहार स्थली है। इसी लीला को निकुंज के माध्यम से दर्शाया गया है। यहां पर श्रीकृष्ण के पद्मनाभ स्वरूप का दर्शन भी भक्तों को होता है, जो झांकी में दर्शाया गया है।
इससे पहले प्रातःकाल नैना श्रीवास्तव, पं.दामोदर शर्मा, मानस गोस्वामी ने अपनी राग सेवा के माध्यम से ठाकुरजी को रिझाया। वहीं सायंकाल रासाचार्य स्वामी फतेहकृष्ण एवं स्वामी हरेकृष्ण शरद ने अपने सुमधुर गायन से सभी को मोहित कर लिया। उन्होंने अपना चंदा सा मुखड़ा दिखाये जा…, मेरौ कान्हा को कोई मत देखो नजरिया लग जाएगी रे…. आदि पद गाकर वातावरण को भक्तिमय कर दिया। वहीं भजन गायक सुजीत कुमार ओझा ने लता माधुरी कुंज सुहाई देखो सखी फूल कुंज बनाई… आदि भजन प्रस्तुत किए। कलाकारों का स्वागत एवं सम्मान आचार्य वेणुगोपाल गोस्वामी ने किया। सायंकाल की संध्या आरती आचार्य सुवर्ण गोस्वामी ने की। सभी आगंतुक भक्तों का स्वागत सेवायत अभिनव गोस्वामी ने किया।

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