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नृत्य सीखने की कोई उम्र नहीं, लगन और परिश्रम जरूरी: पद्मश्री गीताचंद्रन 

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वृन्दावन, मीडिया जगत से शास्त्रीय संगीत की दुनिया में कदम रखने वाली पद्मश्री गीता चंद्रन ने बताया कि केवल 5 वर्ष की उम्र से उनकी नृत्य के प्रति दीवानगी रही। तभी से भारत नाट्यम का प्रशिक्षण लेना शुरू कर दिया था। गीत-संगीत और नृत्य एक-दूसरे के पूरक हैं। इन्हें सीखने में उम्र बाधा नहीं होती। यह विचार उन्होंने ठा.राधारमण मंदिर में आयोजित ग्रीष्मकालीन निकुंज सेवा महोत्सव में नृत्य सेवा प्रस्तुत करने के बाद साक्षात्कार में कही। उन्होंने कहा कि केवल सच्ची लगन और परिश्रम जरूरी है। तभी नृत्य और संगीत विधा में पारंगत होकर नृत्य की कला रूपी प्राचीन धरोहर को लुप्त होने से बचाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि नृत्य सेवा के माध्यम से वह पर्यावरण संरक्षण, महिला उत्पीड़न और अनैतिक अपराधों के खिलाफ भी विरोध करती हैं। 

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