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घर-घर जाकर दंपति परिवार नियोजन की जानकारी देंगी आशा-एएनएम

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– 10 जुलाई से चलेगा जनपद में आयोजित होगा पखवाडा

बुलन्दशहर से सतीश कुमार ब्यूरो चीफ की रिपोर्ट

बुलंदशहर । प्रदेश में गुरुवार से दंपति संपर्क अभियान शुरू हो गया है, जो 10 जुलाई तक चलेगा। इस दौरान आशा कार्यकर्ता घर – घर जाकरदंपति से मिलेंगे और उन्हें परिवार नियोजन के फायदे बताएंगी। सीएमओ डॉ. केएन तिवारी ने बताया कि यह भी समझाएंगी की कैसे दो बच्चों के बीच 3 साल का सुरक्षित अंतर रखें। इतना ही नहीं नव दंपति को वह शादी के दो साल बाद ही पहले बच्चे की सलाह देंगी। संपर्क अभियान के दौरान दंपति को परिवार नियोजन के साधनों के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी जाएगी।
इसके बाद दूसरे चरण में 11 से 24 जुलाई जनसंख्या स्थिरता पखवाड़ा मनाया जाएगा। दूसरे चरण में दम्पतियों को परिवार नियोजन के साधन उपलब्ध कराए जाएंगे। इस पूरे कार्यक्रम की थीम भारत सरकार की ओर से परिवार नियोजन से निभाएं जिम्मेदारी, मां और बच्चे के स्वास्थ्य की पूरी तैयारी रखा गया है।

बुलंदशहर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. केएन तिवारी ने बताया कि पूरे कार्यक्रम का मकसद मातृ व शिशु स्वास्थ्य की बेहतरी के बारे में परिवार कल्याण कार्यक्रम की महत्ता प्रदर्शित करना व जनसंख्या स्थिरीकरण में जन सहयोग के महत्व से लोगों को परिचित कराना है। उन्होंने बताया कि दंपत्ति संपर्क पखवाड़ा बृहस्पतिवार से प्रारंभ हो गया है यह 10 जुलाई तक चलेगा। पहले चरण में आशा, एएनएम जनसमुदाय को बेहतर मातृ व शिशु स्वास्थ्य में परिवार नियोजन की विधियों की महत्ता के संबंध में जागरूक करेंगी। जिला स्तर पर डिस्ट्रिक्ट कम्यूनिटी प्रोसेस मैनेजर (डीसीपीएम) व ब्लाक स्तर पर बीसीपीएम को यह जिम्मेदारी दी गई है कि वे आशाओं के माध्यम से जनजागरूकता अभियान व सास बहू सम्मेलन का आयोजन कराएं। दूसरा चरण 11 जुलाई से 24 जुलाई तक मनाया जाएगा।

परिवार नियोजन कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डा. एसके गिरी ने बताया कि आशा और एएनएम परिवार नियोजन के स्थाई साधनों जैसे महिला और पुरुष नसबंदी के बारे में जानकारी देंगी। इसके साथ ही अस्थाई साधन जैसे प्रसव बाद आईयूसीडी यानी कापर टी, अंतरा, आईयूसीडी, छाया, कंडोम और रोजाना खाई जाने वाली गर्भ निरोधक गोली के बारे में जानकारी देंगी और इनके फायदे भी बताएंगी। इससे संबंधित पम्पलेट का भी वितरण किया जाएगा। इन साधनों के इस्तेमाल के लिए रजामंद होने पर सूची तैयार की जाएगी। यह कार्य वृहस्पतिवार से शुरू हो गया है।इसके बाद अगले चरण में 11 जुलाई से जनसंख्या स्थिरता पखवाड़ा प्रारंभ हो जाएगा। पखवाड़े में सभी सामुदायिकस्वास्थ्य केंद्रों, जिला अस्पताल में संबंधित जरूरतमंद को उनकी सहमति के आधार पर परिवार नियोजन का स्थाई और अस्थाई साधन मुहैया कराया जायेगा। यानी यदि कोई नसबंदी के लिए रजामंद है तो उसे यह सुविधा दी जाएगी।

ये मिलती है प्रोत्साहन राशि

परिवार नियोजन के नोडल अधिकारी डा. एसके गिरी ने बताया कि नसबंदी कराने वाले पुरुषों को बतौर प्रोत्साहन तीन हज़ार और महिलाओं को दो हज़ार रुपए की धनराशि दी जाती है। इसके साथ ही नसबंदी के चयन के लिए तैयार करने वाली आशा को एक हज़ार रुपये की प्रोत्साहन राशि मिलती है। अस्थाई विधियों में प्रसव पश्चात आईयूसीडी एवं गर्भपात स्वत: व सर्जिकल उपरांत आईयूसीडी, जिसको सरल भाषा में कॉपर-टी कहा जाता है के लिए लाभार्थी को 300 रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाती है। वही अंतरा इंजेक्शन की प्रति डोज पर 100 रूपये दिये जाते हैं। उन्होंने बताया कि मई माह के दौरान जनपद में कुल 186 महिला नसबंदी हुई हैं जबकि पुरुष नसबंदी केवल एक हुई है। वर्ष 2018-19 में लगभग आठ हजार से अधिक महिलाओं ने परिवार नियोजन के स्थायी और अस्थाई साधन प्रयोग किये। उनका कहना कि महिला नसबंदी के मुकाबले पुरुष नसबंदी ज्यादा सुरक्षित और आसान तरीका है। इसमें कोई चीरा या टांका भी नहीं लगता। तीन माह बाद टेस्ट कराने पर शुक्राणु शून्य आएं तो नसबंदी सफल मानी जाती है।

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